बर्थडे स्‍पेशल: जाने दुनिया को गुदगुदाने वाले चार्ली चैपलिन के बारे में कुछ खास बाते 

नई दिल्ली: बिना कुछ बोले ही दुनिया को हँसाने वाले कलाकार चार्ली चैपलीन का आज जन्मदिन है. लोगो को हंसना एक कला होता है और ये कला हर किसी इंसान में नहीं होता है. जो लोग कॉमेडियन के तौर पर जाने जाता है. वो लोग अपनी निजी जिंदगी के दर्द को पीछे रखकर दूसरों के चेहरों पर मुस्कान लाने का काम करते हैं. ऐसा ही कला चार्ली चैपलीन में था जो बिना बोले ही लोगों को हंसा देते थे. चार्ली चैपलीन भले ही इस दुनिया में न हों लेकिन उनकी कॉमेडी के लोग आज भी दीवाने है. लोग आज भी उनकी कॉमेडी को देखते है और पसंद करते हैं. आज चार्ली चैपलीन की 129वीं बर्थ एनिवरसरी है जहां सारा देश उन्हें याद कर रहा है. 

जाने कैसे हुई थी चार्ली चैपलीन की करियर की शुरुआत 
आपको बता दे दुनिया को हंसाने वाले चार्ली चैपलीन की आज 129वीं बर्थ एनिवरसरी है. चार्ली चैपलिन का जन्म 16 अप्रैल 1889 को इंग्लैंड के वॉलवर्थ में हुआ था. गौरतलब है की चार्ली जब 5 साल के थे तब उन्होंने एक शो किया था. बता दे इस शो को करने का कारण ये था की, एक बार उनकी मां स्टेज पर गाना गा रही थीं. उसी समय गले की एक बीमारी के कारण उनकी आवाज बंद हो गई और वो आगे नहीं गा पायीं। जिसके बाद वहां मौजूद लोग बेहद नाराज हुए और जोर जोर से चिल्लाते हुए चार्ली की मां को सुनाने लगे. उसके बाद कॉन्सर्ट के मैनेजर ने पांच साल के चार्ली को मंच पर भेज दिया। उसके बाद छोेटे से चार्ली ने अपनी मासूम सी आवाज में अपनी मां का ही गाना गया। इससे वहां मौजूद दर्शक बहुत खुश हुए और चार्ली पे सिक्कों की बारिश कर दी।

उसके बाद चार्ली बड़े हुए जिसके बाद उन्होंने अपनी करियर की शुरुआत 1940 में हिटलर पर ‘द ग्रेट डिक्टेटर’ फिल्म से की थी.  इसमें उन्होंने हिटलर की नकल करते हुए उनका मजाक बनाया था. चार्ली चैपलिन को 1973 में ‘लाइम-लाइट’ में बेस्ट म्युजिक के लिए ऑस्कर अवॉर्ड मिला था. यह फिल्म 21 साल पहले बनी थी, लेकिन इसका प्रदर्शन लॉस ऐंजिलिस में 1972 से पहले नहीं हुआ था. यहां प्रदर्शन के बाद इस फिल्म का नामांकन ऑस्कर के लिए हो पाया था. 

चार्ली चैपलिन ने ‘तानाशाही’ का जवाब भी हास्य से ही दिया............ 
आपको बता दे चार्ली अपनी ज्यादातर फिल्मों में ट्रैंप नाम का किरदार अदा करते थे. ये इसलिए क्योकि कहा जाता है की, ये किरदार उनका अपना ही अतीत था जिसे उन्होंने अपने मुफलिसी के दौर में जिया था. वही  ‘तानाशाही’ के वक्त चार्ली चैपलिन ने  लोगों को सिखाया कि डर को हास्य से हराया जा सकता है. जिसके बाद चार्ली ने सबको हंसाने का ये काम किया। बता दे चार्ली चैपलिन ने बहुत सी मौन फिल्मों में अपने अभिनय से दुनिया को हंसाया लेकिन उनकी फिल्म ‘द ग्रेट डिक्टेटर’ को कालजयी माना जाता है। ये फिल्म उस वक्त बनार्इ गर्इ थी जब नाजी जर्मनी के ब्रिटेन से अच्छे संबंध थे।

बता दे चार्ली चैपलिन को 1929 में ‘द सर्कस’ के लिए ऑस्कर अवार्ड ने ऑनरेरी अवार्ड दिया. उसके बाद उन्हें 1972 में लाइफ टाइम ऑस्कर अवॉर्ड दिया गया. 1952 में बेस्ट ओरिजनल म्युजिक स्कोर पुरस्कार लाइमलाइट के लिये प्राप्त हुआ. आज भी हम चार्ली चैपलिन को याद करते है और आज भी हम उनका कॉमेडी वीडियो देख कर उतना ही हंस हंसकर लोटपोट होते है.