विश्व जल दिवस : जलसंकट का खतरा सिर्फ केपटाउन पर ही नहीं बल्कि भारत के इस शहर पर मंडरा रहा है

नई दिल्ली : ये तो आप लोग अच्छे से जानते हैं कि जल हमारे जीवन के लिए कितना महत्वपूर्ण है इसके बिना जीवन की कल्पना करना भी असम्भब है इसी जल को बचाने के लिए प्रत्येक बर्ष 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है। पूरे विश्व के लोगों द्वारा हर वर्ष 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है। वर्ष 1993 में संयुक्त राष्ट्र की सामान्य सभा के द्वारा इस दिन को एक वार्षिक कार्यक्रम के रुप में मनाने का निर्णय किया गया। लोगों के बीच जल का महत्व, आवश्यकता और संरक्षण के बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिये हर वर्ष 22 मार्च को विश्व जल दिवस के रुप में मनाने के लिये इस अभियान की घोषणा की गयी थी।

विश्व जल दिवस क्यों मनाया जाता है

यह अभियान यूएन अनुशंसा को लागू करने के साथ ही वैश्विक जल संरक्षण के वास्तविक क्रियाकलापों को प्रोत्साहन देने के लिये सदस्य राष्ट्र सहित संयुक्त राष्ट्र द्वारा मनाया जाता हैं। इस अभियान को प्रति वर्ष यूएन एजेंसी की एक इकाई के द्वारा विशेष तौर से बढ़ावा दिया जाता है जिसमें लोगों को जल मुद्दों के बारे में सुनने व समझाने के लिये प्रोत्साहित करने के साथ ही विश्व जल दिवस के लिये अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों का समायोजन शामिल है। इस कार्यक्रम की शुरुआत से ही विश्व जल दिवस पर वैश्विक संदेश फैलाने के लिये थीम (विषय) का चुनाव करने के साथ ही विश्व जल दिवस को मनाने के लिये यूएन जल उत्तरदायी होता है।

पिछले दिनों एक रिपोर्ट आई थी कि दक्षिण अफ्रीका के शहर केपटाउन में कुछ ही दिनों का पानी बचा हआ है यानि की एक वक्त के बाद शहर में पानी खत्म हो जाएगा। जलसंकट का खतरा सिर्फ केपटाउन पर ही नहीं बल्कि आने वाले समय में विश्व के कई देशों पर मंडराने वाला है। पर्यावरण के क्षेत्र में कार्यरत संस्था सेंटर फॉर सांइस (सीएसई) की मदद से प्रकाशित पत्रिका डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि ब्राजील के साओ पाउलो और भारत के बेंगलुरु में जल्द ही पानी की किल्लत हो जाएगी।

पानी प्राकृतिक तापमान पर पाया जाने वाला एक मात्रा पदार्थ है जो ठोस, द्रव और गैस की अवस्‍था में पाया जाता है। दुनिया भर में प्रत्येक वर्ष 1,500 घन गंदे जल का निर्माण होता है। हमारे पृथ्वी ग्रह का 70% से अधिक हिस्सा जल से भरा है। धरती पर लगभग एक अरब 40 घन किलो लीटर पानी है।

धरती पर लगभग 97.5 प्रतिशत पानी समुद्र में है जो खारा है। धरती पर लगभग 1.5 प्रतिशत पानी बर्फ के रूप में है। धरती पर लगभग केवल 1 प्रतिशत ताजा पानी नदी, तालाब, झरनों और झीलों में है जो पीने लायक है। इस 1 प्रतिशत पानी का 60 वां हिस्सा खेती और उद्योग कारखानों में खपत होता है,40 वां हिस्सा पीने, भोजन, नहाने और साफ-सफाई में खर्च होता है। जल जनित बीमारियों के कारण प्रतिवर्ष 22 लाख मौतें विश्व में होती हैं। विश्व में प्रति 10 व्यक्तियों में से 2 लोगों को साफ पानी नहीं मिल पाता है।

जानकारी के मुताबिक, द वॉटर गैप’ रिपोर्ट के मुताबिक युगांडा, नाइजर, मोजांबिक, भारत औऱ पाकिस्तान लिस्ट में उन देशों में शामिल हैं जहां पर सबसे ज्यादा जलसंकट मंडरा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन देशों में कई फीसदी लोगों को साफ पानी पीना नसीब नहीं हो पा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 16.3 करोड़ लोग साफ पानी के लिए तरस रहे हैं। बता दें कि पिछले साल इसी रिपोर्ट में यह आंकड़ा 6 करोड़ 30 लाख लोगों का था। यानि की महज एक साल में इस आंकड़े में कई गुणा इजाफा हो गया है। इस लिए कई सारे स्लोगन बनाया गया है जैसे की, "पानी बचाओ धरती बचाओ"।