हिमाचल: कारोबारी नीरव मोदी के बाद एक और घोटाला, 'इंडियन टेक्नो मैक' कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज

शिमला : हिमाचल प्रदेश के उत्पाद शुल्क और कर विभाग ने धोखाधड़ी के एक बड़े मामले में इंडियन टेक्नो मैक नाम की कंपनी के खिलाफ 2,175 करोड़ रुपये सेल्स टैक्स की चोरी के आरोप में केस दर्ज किया है। हिमाचल प्रदेश एक्साइज एंड टैक्स डिपार्टमेंट ने 'इंडियन टेक्नो मैक' कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। आप को बता दे, एक ओर हीरे के बड़े कारोबारी नीरव मोदी और रोटोमैक कंपनी के भारी भरकम लोन डिफॉल्ट से जहां देश अभी तक उबर नहीं पाया है वहीं हिमाचल प्रदेश में एक इससे भी बड़ा घोटाला सामने आया है। इस कंपनी पर सरकार के 2175 करोड़ रुपए के सेल्स टैक्स चोरी का आरोप है। 

जानकारी के मुताबिक कंपनी के प्रबंध निदेशक के अलावा तीन अन्य लोगों के खिलाफ IPC की धारा 467, 468, 470 समेत कई अन्य धाराओं के तहत एक्साइज डिपार्टमेंट ने यह मामला सिरमौर में दर्ज कराया है। हिमाचल के सिरमौर में स्थित इस कंपनी के प्रबंधक निदेशक और तीन अन्य निदेशक को इस धोखाधड़ी मामले में शिकायत दर्ज किया गया है। यहां स्थित इंडियन टैक्नोमैक लिमिटेड ने भी करीब छह हजार करोड़ का घोटाला किया है। हैरानी की बात है कि कंपनी का मैनेजिंग डायरेक्टर राकेश कुमार शर्मा करोड़ों की धोखाधड़ी कर विदेश भाग चुका है।

सभी बैंकों में 3500 करोड़ के धोखाधड़ी

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की खबर के मुताबिक इंडियन टेक्नो मैक' कंपनी ने सरकार के अलावा अलग-अलग बैंकों के करीब 6000 करोड़ रुपए का गबन किया है।  इस कंपनी को अलग-अलग बैंकों के 3500 करोड़ जबकि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को 780 करोड़ रुपए देने हैं। PF, लेबर डिपार्टमेंट और इलेक्ट्रिसिटी डिपार्टमेंट को करीब 15-20 करोड़ रुपए देने हैं। कंपनी ने सरकार और बैंकों के संगठन को 6,000 करोड़ रुपये से अधिक का चूना लगाया है। मिश्रधातु का कारोबार करने वाली यह कंपनी 2009 से 2014 के बीच सेल्स टैक्स में 2,175 करोड़ रुपये का धोखा किया।

 2009 से 2014 के दौरान इस कंपनी ने किया घोटाला

यह कंपनी हिमाचल प्रदेश में रजिट्रार ऑफ कंपनीज में रजिस्टर्ड है। इस समय इसे लिक्विडेशन में रखा गया है। कंपनी में राकेश कुमार के अलावा चार ओर निदेशक हैं वह भी भूमिगत हैं। हैरानी की बात है कि 2014 में ही कंपनी ने अपना ऑपरेशन बंद कर दिया था। लेकिन न तो सरकारी अमले ने इस ओर ध्यान दिया, न ही बैंकों ने। 2016 में कंपनी की इस धोखाधड़ी का पता तब चला,जब राज्य सरकार को आबाकारी एंव कराधान विभाग ने तीन सालों में 2100 करोड़ के रिवेन्यू घाटे के बारे में अपनी रिर्पोट भेजी। हिमाचल प्रदेश के DGP एसआर मर्डी ने कहा, 'पहले हम मामले की तहकीकात करेंगे और जरूरत पड़ने पर ED को भी जांच में शामिल किया जाएगा।' बता दें कि यह कंपनी 2014 में ही बंद हो चुकी है। 2009 से 2014 के दौरान इस कंपनी ने तमाम तरह के घोटाले किए हैं।

आप को बताते चले की उसके बाद आनन में कार्रवाई आगे बढ़ी लेकिन अब जाकर कंपनी का मूल्यांकन किया गया तो मात्र 150 करोड़ रूपये की संपत्ति ही हाथ लगी है। अब सवाल उठ रहा है कि करोड़ों की वसूली कैसे होगी। 2014 में एक्साइज डिपार्टमेंट ने अपनी जांच में पाया था कि यह कंपनी VAT की चोरी कर रही है जिसके बाद इस कंपनी को सील कर दिया गया था। उस घटना के चार साल बाद मामला दर्ज किया गया है। इस विधानसभा सत्र के दौरान CPM विधायक राकेश सिंघा ने 'इंडियन टेक्नो मैक' कंपनी का मामला उठाया था। जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने कहा कि अधिकारियों से फिलहाल पूछताछ की जाएगी और तथ्यों के सामने आने के बाद इसे प्रवर्तन निदेशालय को सौंपा जाएगा।